बस्तर : वन अधिकार पत्र मिलने से वनवासियों हुए खुश, 40 हजार से अधिक परिवारों को मिला जीवन-यापन का जरिया

बस्तर. वन अधिकार मान्यता पत्र देने की शासन की महत्वाकांक्षी योजना ने बस्तर जिले में वनभूमि पर पीढ़ियों से काबिज वनवासियों परिवारों के जीवन में खुशियों का नया दौर ला दिया है। वनअधिकार पट्टा मिल जाने से इन परिवारों के मन में वर्षों से समाया बेदखली का भय दूर हो गया है। वनभूमि पर काबिज परिवार अब बेहतर तरीके से खेती-किसानी करने लगे हैं। इस योजना के अंतर्गत अब तक कुल 40 हजार 85 हितग्राही लाभान्वित हो चुके हैं। इसके तहत् 34 हजार 566 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र और 5 हजार 519 सामुदायिक वन अधिकार पत्रक शामिल है।

वनभूमि से बस्तर जिले के 40 हजार से अधिक परिवारों को मिला जीवन-यापन का जरिया

वनभूमि का मालिकाना हक मिलने से काबिज परिवार बेहद खुश हैं। इसके लिए इन परिवारों ने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल का आभार जताते हुए उनका धन्यवाद ज्ञापित किया है। बस्तर जिले के बकावण्ड विकासखण्ड के चारगांव के आदिवासी किसान सोमन ने कहा कि पट्टा मिल जाने से उनके परिवार को जीवन-यापन का आधार मिल गया है। उन्हें वनभूमि अधिकार मान्यता पत्र के तहत कुल   4.25 हेक्टेयर भूमि का मालिकाना हक मिला है। वन अधिकार से प्राप्त जमीन से इस वर्ष उसे मक्के की फसल से 39 हजार 200 रूपए, धान की फसल से 30 हजार 400 रूपए और दलहन फसलों से 6 हजार से अधिक राशि की आमदनी हुई है। इसी प्रकार वन अधिकार मान्यता पत्रक योजना की सराहना जिले के तोकापाल विकासखण्ड के ग्राम ऐरण्डवाल के हितग्राही चन्द्ररू, हिड़मे, जगरी, मंगलू, ग्राम मंडवा के रामलाल एवं पांडू ने भी सराहना की है। उन्होंने राज्य सरकार को इस निर्णय को गरीब एवं किसान हितैषी निर्णय बताते हुए मुक्तकंठ से सराहना की है।

जिले में वन अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत सातों विकासखण्ड में वितरित भूमि पर भूमि विकास से संबंधित विभिन्न कार्य किए गए हैं। जिसके तहत हितग्राहियों के भूमि का समतलीकरण और मेड़ बंधान कार्य, खाद-बीज और कृषि उपकरण क्रय करने के लिए हेतु सहायता राशि और किसान समृद्धि अन्तर्गत सिंचाई कार्य के लिए नलकूप खनन कार्य सहित किसानों को सिंचाई हेतु स्प्रिंकलर का वितरण किया गया है। इसके अतिरिक्त जिले में वन अधिकार पत्र प्राप्त 9 हजार 744 हितग्राहियों को इंदिरा आवास की स्वीकृति भी दी गई है। प्रधानमंत्री किसान किताब सम्मान निधि योजना से 8 हजार 721 व्यक्तिगत पंजीकृत वन अधिकार पत्रक धारक को भी लाभ मिला है।