विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर दस्तखत करने से राज्यपाल अनुसुईया उइके ने किया इंकार, जानिए क्या है वजह?

रायपुर। राज्यपाल अनुसुईया उइके से आज यहां राजभवन में संसदीय कार्य, कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी मंत्री रविन्द्र चौबे, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, नगरीय प्रशासन एवं श्रम मंत्री शिवकुमार डहरिया और उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने मुलाकात की। उन्होंने राज्यपाल के समक्ष लंबित विधेयकों तथा छत्तीसगढ़ से जुड़े विकास के मुद्दों पर चर्चा की। राज्यपाल ने मंत्रियों की बात सुनी और विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के मामले पर उन्होंने दस्तखत करने से इंकार कर दिया।

राज्यपाल ने कहा कि हम सबका उद्देश्य छत्तीसगढ़ का विकास करना है। इसके लिए जनहित में कार्य किया जाना चाहिए और जन समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तथा अन्य राज्यों की प्रणाली का अध्ययन किया जाएगा और विशेषज्ञों से सलाह लेने के पश्चात जो भी निर्णय लिया जाएगा उसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखना होगा। किसी भी विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करना होता है, उसे पूरा किया जाएगा। हमें यह प्रयास करना चाहिए कि जनता की समस्याओं का जमीनी स्तर पर निराकरण हो।

राज्यपाल ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के लाभांश, उनका बीमा और उनके बच्चों की छात्रवृत्ति की योजना से संबंधित समस्या का त्वरित निराकरण करें। उन्होंने कहा कि पांचवी अनुसूची क्षेत्र में जो ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत में परिवर्तन किया गया है, उससे जनजातियों के अधिकारों का हनन हो रहा है। इसमें परिवर्तन की आवश्यकता है। उन्होंनेे कहा कि जल्द विश्वविद्यालय समन्वय समिति की बैठक आयोजित की जाएगी, इस संबंध में उच्च शिक्षा मंत्री को तैयारी करने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने कृषि मंत्री चौबे से कहा कि उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द पूर्ण करें। वन मंत्री अकबर ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों से संबंधित विषयों का जल्द समाधान कर लिया जाएगा। इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं।